...... सिपाही की तरह जिस IPS को सीएम योगी ने फ्लॉप कप्तानी से हटाया, उसे अब महत्त्वपूर्ण फील्ड पोस्टिंग ! नयी तैनाती पे खड़े हुए सवाल ! गौकसी रोकने से लेकर क्राइम कण्ट्रोल में फेल होने पे RSS के बड़े जिम्मेदारों की शिकायत पे हटे थे आईपीएस साहब .....
लखनऊ (धर्मेंद्र रस्तोगी/जर्नलिस्ट इन्वेस्टीगेशन न्यूज)। अपनी पुलिस कप्तानी में गौकसी कराने से लेकर क्राइम कण्ट्रोल में पूरी तरह फ्लॉप होने व फील्ड में न निकलने, मीडिया कर्मी को धमकाने, उच्चाधिकारियों से टशन में बात करने समेत विभिन्न आरोपों के घेरे में रहने के कारण सिपाही की तरह हटाए गए 2010 बैच के यूपी कॉडर के आईपीएस किरीट हरिभाई राठौड़ की शनिवार में हुई महत्त्वपूर्ण फील्ड पोस्टिंग ने कई तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यूपी में बेहतर लॉ एंड ऑर्डर व अपराध नियंत्रण को लेकर खासी संजीदा रहते हैं। कई मौकों पे योगी ने लापरवाह, गैर अनुशासित,अयोग्य, दागी, फील्ड जिम्मेदारी में फेल आईपीएस और आइएएस अफसरों का सस्पेंशन करके गुरुर तोड़ा है। ऐसा ही नाम है किरीट हरिभाई राठौड़। पीलीभीत पुलिस कप्तान रहते किरीट की सिपाही की तर्ज पे ताबड़तोड़ शिकायतें हुईं। वर्दी पहनने के दौरान लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़ा सामान्य आचरण कैसा हो, इसकी बाकायदा ट्रेनिंग पर काफी रूपये आईपीएस पे खर्च होता है। पीलीभीत में कप्तानी संभालते ही जिस किरीट को क्राइम कण्ट्रोल करना था? लॉ एंड ऑर्डर संभालना था? बड़ी आपराधिक घटनायें रोकनी थीं? आयेदिन हो रही गौकसी पे अंकुश लगाना था? आम जनता व मीडिया से उच्च कोटि का आचरण करना था? अनुशासित महकमे में आला अफसरों के दिशा निर्देशों का पूरी जिम्मेदारी से अनुपालन करना था? इन एक भी टॉपिक पर किरीट फिट नहीं बैठे। किरीट ने वर्दी वाले जिम्मेदार की सारी मर्यादायें लाँघ दीं। न पब्लिक की आकांक्षाओं पर खरा उतरे और न प्रदेश शासन व आला अफसरों की। आलम ये हो गया था कि किरीट की कप्तानी में ताबड़तोड़ क्राइम से जिला थर्रा गया। हर दूसरे दिन गौकसी की घटनाएं होना आम बात हो गयी। थानों की बेलगाम पुलिसिंग पर सवाल खड़ा करने वाली पब्लिक को दारोगा की तरह किरीट हड़काने लग गए। क्राइम कंट्रोल की मंशा से जिस कप्तान को शाम ढलते ही फुट पेट्रोलिंग करते हुए सड़कों पर होना चाहिए, वो सायं ही वातानुकूलित सरकारी आवास में कैद हो जाते थे। उस समय के आईजी व एडीजी ही नहीं बल्कि पुलिस मुख्यालय, सीएम आवास तक किरीट की शिकायतों का अंबार लग गया। आरएसएस आदि कई हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में पहुंच आईजी और एडीजी ऑफिसों के अलावा मुख्यमंत्री योगी से मिलकर किरीट की शिकायत कर गंभीर आरोप लगाए। आखिरकार गुस्साये मुख्यमंत्री ने सिपाही की तरह किरीट की कप्तानी छीनी थी। तत्काल प्रभाव से हटाकर किरीट वेटिंग में डाल दिए गए। ट्रांसफर होने पर पत्रकार ने किरीट की खबर प्रसारित की तो किरीट ने पत्रकार को धमकाते हुए कहा कि लाल डायरी पर नाम नोट कर लिया है, सबक सिखाऊंगा। अब आज शनिवार को जारी सिंगल आदेश में किरीट की फील्ड पोस्टिंग वाराणसी में एडिशनल सीपी के तौर पे होते ही पोस्टिंग पर सवाल खड़े हो गए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। (जर्नलिस्ट इन्वेस्टीगेशन न्यूज)।