जिनकी शिकायत, उनका बयान नहीं; जिन पर आरोप, उन्हीं के बयान पर आख्या!
पीलीभीत (जे.आई.न्यूज़/अजय रस्तोगी): नगर पालिका परिषद पीलीभीत की एक जांच आख्या को लेकर नया विवाद सामने आया है। सामाजिक कार्यकर्ता एवं नगर अध्यक्ष राष्ट्रीय लोकदल वीरेंद्र रस्तोगी ने आरोप लगाया है कि उनके द्वारा की गई शिकायत पर अधिशासी अधिकारी कार्यालय द्वारा जो आख्या तैयार की गई है, उसमें उनका बयान तक दर्ज नहीं किया गया। इतना ही नहीं, जिन लोगों के विरुद्ध शिकायत की गई थी, उन्हीं के कथनों के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर दी गई। इससे पूरी जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
वीरेंद्र रस्तोगी का कहना है कि उन्होंने शहर के स्वच्छता पार्क क्षेत्र एवं सड़क किनारे अवैध अतिक्रमण तथा दुकानों के संचालन से संबंधित शिकायत जिलाधिकारी से की थी। शिकायत के बाद जांच तो की गई, लेकिन जांच के दौरान न तो उन्हें बुलाया गया और न ही उनका पक्ष दर्ज किया गया। इसके बावजूद अधिशासी अधिकारी कार्यालय की ओर से आख्या प्रस्तुत कर दी गई।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि जांच रिपोर्ट में जिन व्यक्तियों के बयान का उल्लेख किया गया है, उन्हीं व्यक्तियों के विरुद्ध शिकायत की गई थी। ऐसे में सवाल यह उठता है कि यदि शिकायतकर्ता का बयान ही नहीं लिया गया तो जांच किस आधार पर पूरी कर दी गई? उन्होंने इसे निष्पक्ष जांच के सिद्धांतों के विपरीत बताते हुए उच्च अधिकारियों से मामले की पुनः जांच कराने की मांग की है।
वीरेंद्र रस्तोगी ने कहा कि किसी भी शिकायत की जांच में सबसे महत्वपूर्ण पक्ष शिकायतकर्ता का होता है। यदि उसी का पक्ष नहीं सुना जाए और केवल दूसरे पक्ष के बयानों को आधार बनाकर निष्कर्ष निकाल दिया जाए, तो न्यायसंगत जांच की अपेक्षा कैसे की जा सकती है। उनका कहना है कि जांच अधिकारी को दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर वस्तुस्थिति का निष्पक्ष परीक्षण करना चाहिए था।