योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को पलीता! विकास के नाम पर भ्रष्टाचार, पंचायत में सरकारी धन का बंदरबांट
जे. आई. न्यूज़/ अजय रस्तोगी
जहां एक ओर डबल इंजन की सरकार अपराध एवं भ्रष्टाचार मुक्त उत्तर प्रदेश का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर निचले स्तर पर अधिकारी, कर्मचारी एवं जनप्रतिनिधियों की कथित मिलीभगत ने भ्रष्टाचार की सारी हदें पार कर दी हैं। हालात ऐसे हैं कि सरकारी योजनाओं के नाम पर खुलेआम सरकारी धन का बंदरबांट किया जा रहा है, जिससे सरकार की छवि को धूमिल करने में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही।
अगर पंचायती राज विभाग की ही बात करें तो क्षेत्र की कई ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर बड़े स्तर पर वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आ रहे हैं। आरोप है कि ग्राम प्रधान अपने, अपने परिवार, रिश्तेदारों और करीबियों के खातों में ग्राम निधि से भुगतान करा रहे हैं। वहीं मनरेगा में फर्जी हाजिरी लगाकर सरकारी धन निकालने का खेल भी लगातार जारी है।
आरोप है कि पंचायतों में बिना कार्य कराए भुगतान निकालना अब आम बात हो चुकी है। कागजों में विकास कार्य पूर्ण दिखाए जाते हैं, जबकि धरातल पर स्थिति बिल्कुल विपरीत नजर आती है। कई स्थानों पर निर्माण कार्यों में घटिया सामग्री का इस्तेमाल, फर्जी बिल-वाउचर लगाना और अभिलेखों में हेराफेरी करने जैसे गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं।
हैरानी की बात यह है कि लाखों रुपये की लागत से बने पंचायत घर बदहाल स्थिति में पड़े हैं। पंचायत सहायक पंचायत घरों में नजर नहीं आते। सार्वजनिक शौचालयों में केयर-टेकर का प्रतिमाह वेतन तो निकल रहा है, लेकिन साफ-सफाई व्यवस्था बदहाल है। ग्राम पंचायतों में कार्यरत सफाईकर्मियों की स्थिति भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि कई सफाईकर्मी वेतन तो ले रहे हैं, लेकिन गांवों में सफाई करने नहीं पहुंचते। कुछ स्थानों पर उन्होंने अपने स्थान पर निजी कर्मचारी लगा रखे हैं और यह पूरा खेल ग्राम प्रधान एवं पंचायत सचिव की मिलीभगत से संचालित हो रहा है।
मनरेगा में भी बड़े स्तर पर अनियमितताओं की शिकायत सामने आ रही है। आरोप है कि फर्जी मजदूर दिखाकर भुगतान निकाला जा रहा है। जिन लोगों ने कभी मजदूरी नहीं की, उनके नाम से भी मस्टर रोल भरकर सरकारी धन का बंदरबांट किया जा रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कुछ लोग गांव से सैकड़ों किलोमीटर दूर रह रहे हैं, फिर भी उनके नाम पर हाजिरी चल रही है।
लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद अधिकारी जांच की बात तो करते हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं होती। सवाल उठता है कि आखिर योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को पलीता लगाने वाले भ्रष्टाचारियों पर प्रशासन इतना मेहरबान क्यों हो जाता है?
लोगों ने मांग की है कि पंचायत खातों, मनरेगा मस्टर रोल, विकास कार्यों और भुगतान विवरण की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि जांच ईमानदारी से हो जाए तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा तथा पंचायत स्तर पर फैले भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा। (जर्नलिस्ट इन्वेस्टीगेशन न्यूज़)