Saturday, 14-03-2026
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शिक्षक की तानाशाही के आगे शिक्षा विभाग मौन! महिला शिक्षिका से बदसलूकी करने वाले आरोपी शिक्षक के विरुद्ध 05 महीने बाद भी नहीं हुई कोई कार्रवाई

मोदी व योगी सरकार की नीतियों पर पलीता लगाने वाले ऐसे शिक्षकों एवं अधिकारियों पर क्यों नहीं हो रही कार्यवाही? शिक्षा एवं बच्चों के जीवन से खिलवाड़ करने वाले आरोपी शिक्षक प्रमोद कुमार को किसका है संरक्षण प्राप्त?

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  • बरेली (जे.आई.न्यूज़): जनपद के क्यारा विकास क्षेत्र के पूर्व माध्यमिक विद्यालय क्यारा में कार्यरत शिक्षिका सीमा शर्मा द्वारा गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जो न केवल शैक्षिक वातावरण को कलंकित करते हैं, बल्कि महिला सम्मान और सुरक्षा की अवधारणा को भी गहरी चोट पहुंचाते हैं। शिक्षिका का आरोप है कि 23 जनवरी 2025 को विद्यालय की प्रार्थना सभा के दौरान तत्कालीन इंचार्ज प्रधानाध्यापक प्रमोद कुमार ने उनके साथ न केवल अभद्र भाषा में गाली-गलौज की, बल्कि विरोध करने पर उनका वीडियो बनाना शुरू कर दिया। जब उन्होंने इसका विरोध किया तो प्रमोद कुमार ने उनका सीधा हाथ पकड़कर मरोड़ दिया, जिससे उनकी रिंग फिंगर टूट गई।

पीड़ित शिक्षिका ने रोते हुए समस्त स्टाफ और बच्चों को अपनी टूटी उंगली दिखाकर मदद की गुहार लगाई, लेकिन आरोपी अध्यापक वीडियो बनाते रहे और बाद में वही वीडियो विद्यालयी ग्रुप पर वायरल कर दिया गया। घटना के तत्काल बाद पीड़िता ने खंड शिक्षा अधिकारी, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी और सहायक शिक्षा निदेशक, बेसिक शिक्षा को स्वयं जाकर अपने साथ हुई घटना से अवगत कराया और लिखित प्रार्थना पत्र भी दिया और टूटी उंगली के मेडिकल दस्तावेज भी प्रस्तुत किए। बावजूद इसके, उन्हें केवल आश्वासन ही मिले, और अब तक कोई ठोस विभागीय कार्यवाही अमल में नहीं लाई गई।

इतना ही नहीं, शिक्षिका का यह भी कहना है कि प्रमोद कुमार, जो पूर्व में भी महिला शिक्षकों व दिव्यांग स्टाफ के साथ अभद्र व्यवहार और हिंसा के मामलों में संलिप्त रहे हैं। विभागीय अधिकारियों का संरक्षण और शिक्षक संघ के प्रभावशाली पदाधिकारियों के सहयोग से जांच को लगातार प्रभावित कर रहे हैं। शिक्षिका का आरोप है कि आरोपी और उसके सहयोगी जानबूझकर झूठे प्रपंच रचकर उसकी छवि धूमिल करने में लगे हैं तथा चल रही जांचों को भटकाने और दबाने का प्रयास कर रहे हैं।

पीड़िता का यह भी कहना है कि उनके पास एक्स-रे रिपोर्ट, मेडिकल सर्टिफिकेट सहित सभी प्रमाण उपलब्ध हैं, जिन्हें वह कई बार संबंधित अधिकारियों को भेज चुकी हैं। फिर भी बीते पाँच महीनों में उन्हें केवल आश्वासन ही मिला है, न्याय नहीं।

इस पूरे प्रकरण ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि ऐसे मामलों में त्वरित और कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो यह न केवल महिला कर्मचारियों की सुरक्षा को खतरे में डालता है, बल्कि शिक्षा विभाग की साख और सरकार की महिला सशक्तिकरण योजनाओं को भी गहरा आघात पहुंचाता है। पीड़िता ने न्याय की उम्मीद में एक बार फिर अधिकारियों से अपील की है कि आरोपी प्रमोद कुमार के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाए, जिससे उसे न्याय मिल सके और शिक्षा जगत में महिलाओं की गरिमा सुरक्षित रह सके।

साथ ही जब मीडिया टीम ने स्कूल में जाकर शिक्षकों से इसकी जानकारी ली तो सभी ने यही कहा कि शिक्षक प्रमोद कुमार के ऐसे उग्र व्यवहार से सभी परेशान हैं, जब प्रमोद कुमार से उनका पक्ष जानना चाहा तो उन्होंने साफ इनकार कर दिया कि वह किसी भी तरह की कोई बात नहीं करना चाहते हैं और अपना मोबाइल निकाल कर मीडिया कर्मियों का फोटो और वीडियो बनाने लगे। जैसे ही कैमरामैन ने प्रमोद कुमार को कैमरे में कैद करना चाहा, तुरंत ही वह वहां से क्लास रूम में चले गए। इन सब चीजों से जो बच्चे वहां पढ़ रहे है, उनपर किस तरह का प्रभाव पड़ेगा? यह एक सोचने वाली बात है जहां शिक्षा का मंदिर माना जाने वाला स्कूल में ही शिक्षक जिन्हें गुरु माना जाता है, वह इस तरह से खुले आम लड़ाई झगड़ा गाली-गलौज मारपीट कर रहे हैं, उसका बच्चों पर क्या प्रभाव पड़ेगा और वह क्या सीखेंगे। जहां एक तरफ सरकार की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए नई-नई योजनाएं निकलती है, बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ के नारे लगाए जाते हैं, वहीं उसे स्कूल में बेटियां भी पढ़ रही हैं और उनके सामने ही एक महिला शिक्षक को गाली गलौज अभद्र भाषा प्रयोग किया जा रहा है। जब एक बच्चे से इस बारे में बात की तो उसने बताते हुए कहा कि उस समय हमारी मैडम सीमा शर्मा की कोई गलती नहीं थी सर ने ही गलत व्यवहार किया। इन सबको उच्च अधिकारियों को ध्यान में रखकर इस पर कार्यवाही की जाए। ताकि आने वाले समय में बच्चों को भी पता लगे की गलत व्यवहार या स्कूल में इस तरह की दबंगई नहीं चलेगी। इससे बच्चों को एक और नई सीख देखने को मिलेगी।

इसी क्रम में विद्यालय के स्टाफ ने यह भी आरोप लगाया है कि प्रमोद कुमार जब इंचार्ज अध्यापक थे, तब उन्होंने सत्र 2018 -19 में मेडिकल लिया था, जिसे बाद में उपस्थिति पंजिका में पेजों को फाड़कर नए पृष्ठ चिपका कर और समस्त स्टाफ के फर्जी हस्ताक्षर करके अपने व्यक्तिगत लाभ के लिए चिकित्सा अवकाश को उपस्थिति में परिवर्तित कर दिया। उपस्थिति पंजिका को क्षतिग्रस्त करना एक अपराध की श्रेणी में आता है, जिसकी शिकायत भी शिक्षा विभाग के अधिकारियों को लिखित में की गई है। जिसकी जांच भी दो महीने पूर्व हो चुकी है लेकिन उसके उपरांत भी विभाग के उच्च अधिकारियों द्वारा किसी भी प्रकार की कोई भी कार्यवाही आरोपी शिक्षक प्रमोद कुमार के विरुद्ध नहीं की गई है। जिससे यह स्पष्ट होता है कि उच्च-अधिकारियों का आरोपी प्रमोद कुमार को पूर्ण संरक्षण प्राप्त है, इसीलिए आरोपी प्रमोद कुमार की तानाशाही बरकरार है।

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