Thursday, 26-02-2026
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बारादरी बवाल : थाना गेट कांड में लापरवाह जनसुनवाई अधिकारी पर गिरी गाज, सस्पेंड ! एक दिन में तीन बार फरियाद लेकर पहुंचा युवक, नजरअंदाज किया गया प्रकरण ! पारिवारिक मामले में शहरी थानेदार ने फर्जी तथ्यों पे आधारित केस दर्ज करते ही दिखायी फास्ट पुलिसिंग ! वास्तविक बदमाशों पे थानेदार की कार्रवाई सिफर

धर्मेंद्र रस्तोगी

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लखनऊ (धर्मेंद्र रस्तोगी/जर्नलिस्ट इन्वेस्टीगेशन न्यूज)। जनसुनवाई में घनघोर लापरवाही पर एसएसपी ने थाने के जनसुनवाई अधिकारी को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। विभागीय जाँच के निर्देश दिए गए हैं। दरअसल, चौबीस फरवरी की रात बरेली के बारादरी थाना गेट पे फतेहगंज निवासी अक्षय कुमार ने अपने ऊपर ज्वलनशील पदार्थ डालकर आग लगा आत्महत्या की कोशिश की थी। एसएसपी अनुराग आर्य ने मामले में एसपी सिटी मानुष पारीक से प्राथमिक जाँच करायी तो पता चला कि 24 फरवरी में तीन बार अक्षय कुमार बारादरी थाना अपनी फरियाद लेकर गया था। सीसीटीवी फुटेज ने भी इस बाबत खुलासा कर दिया। फरियादी अक्षय कुमार एक दिन में तीन बार जिस वक्त थाने में शिकायत लेकर गया, उस समय थाना बारादरी की जन शिकायत हेल्प डेस्क पे सब इंस्पेक्टर सुरेन्द्र कुमार शर्मा मौजूद थे। जनशिकायत अधिकारी सुरेंद्र कुमार शर्मा का दायित्व था कि थाना पर आने वाले प्रत्येक आवेदक या फिर आवेदिका की जनसुनवाई कर उनका प्रार्थना पत्र प्राप्त करते हुए जनसुनवाई रजिस्टर में अभिलेखीकरण कर विधिक कार्यवाही सुनिश्चित कराते हुए महत्वपूर्ण, संवेदनशील प्रकरणों को तत्काल उच्चाधिकारियों के संज्ञान में लाते लेकिन जनसुनवाई जैसी बेहद अहम जिम्मेदारी गंभीरता से नहीं ली। प्रकरण में खुली संवेदनहीनता दिखाकर अपने कर्तव्यों के प्रति लापरवाही, उदासीनता बरती। घनघोर लापरवाही से नाराज कप्तान ने सुरेंद्र कुमार शर्मा के खिलाफ एक्शन ले लिया। एसपी नॉर्थ मुकेश मिश्रा को दारोगा के खिलाफ विभागीय जाँच दी गयी है। हाल ही में एक शहरी थानदार, दारोगा व पुलिस कर्मियों का बड़ा खेल उजागर हुआ। हिस्ट्रीशीटरों से भरे थाना क्षेत्र में वास्तविक अपराधियों पे नकेल कसने के बजाए पारिवारिक मामले में फर्जी तथ्यों पर आधारित केस दर्ज कर इतनी फास्ट पुलिसिंग कर डाली कि 24 घंटे में तीन बार महिलाओं को धमकाने पुलिस जा पहुंची। मामला संज्ञान में आने पर एसएसपी ने दारोगा, थानेदार से लेकर सीओ को तलब कर लिया। जमकर फटकारते हुए निर्देश दिए कि वास्तविक पुलिसिंग पर ध्यान दो। पारिवारिक मामलों में बेवजह निर्दोषों को सताने, फंसाने का खेल बंद कर दो। विवेचना का मतलब ही होता है कि पारदर्शी तरीके से तथ्यों की गहनता से जांच कर सही कार्रवाई की जाए। (जर्नलिस्ट इन्वेस्टीगेशन न्यूज)।

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