सहसवान में PMAY पर गंभीर सवाल, ‘दलालों का ATM’ बनने का आरोप पात्र लाभार्थी दफ्तरों के चक्कर काट रहे, अपात्रों को लाभ मिलने की शिकायत; किस्त जारी होने पर कमीशन मांगने के भी आरोप
बदायूं (जे०आई०न्यूज़) सहसवान,गरीब परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी को लेकर सहसवान में गंभीर शिकायतें सामने आ रही हैं। लाभार्थियों का आरोप है कि योजना का लाभ दिलाने के नाम पर कथित बिचौलियों द्वारा अलग-अलग स्तर पर रकम वसूले जाने का खेल चल रहा है। हालात ऐसे बताए जा रहे हैं कि पात्र लोग अपने हक के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, जबकि कथित रूप से प्रभाव और जुगाड़ रखने वाले अपात्र लोगों को भी लाभ मिलने की शिकायतें सामने आई हैं।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, फॉर्म भरने और सर्वे के नाम पर 500 से 2 हजार रुपये, जबकि फोटो और जियो-टैगिंग के नाम पर करीब 5 हजार रुपये तक मांगने के आरोप लगाए जा रहे हैं। इतना ही नहीं, कुछ शिकायतकर्ताओं ने किस्त जारी होने के बाद 10 प्रतिशत तक कमीशन मांगने का भी आरोप लगाया है।
‘पैसा दो तो फाइल आगे, नहीं तो आपत्ति’ का आरोप
कई लाभार्थियों का कहना है कि कथित तौर पर रकम देने से इनकार करने पर फाइल में आपत्ति लगने या प्रक्रिया अटकने का डर दिखाया जाता है। वहीं, पैसे देने वाले लोगों के काम तेजी से होने की शिकायतें भी सामने आई हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
सबसे गंभीर सवाल यह है कि यदि योजना के नाम पर इस तरह की कथित वसूली हो रही है तो इसकी निगरानी व्यवस्था कहां है? क्या लाभार्थियों से रकम मांगने वाले लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी?
PMAY के नाम पर वसूली हुई तो कौन होगा जिम्मेदार?
प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य जरूरतमंद और पात्र परिवारों को आवासीय सहायता उपलब्ध कराना है। ऐसे में यदि पात्रता के बावजूद किसी गरीब लाभार्थी से धन की मांग की जाती है या अपात्र व्यक्ति को अनुचित तरीके से लाभ पहुंचाया जाता है, तो यह न केवल योजना की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है बल्कि सरकारी व्यवस्था की निगरानी पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
अब निगाहें प्रशासन और नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारियों पर हैं। क्या इन शिकायतों की निष्पक्ष जांच होगी? क्या लाभार्थियों से कथित वसूली करने वालों की पहचान होगी? और क्या अपात्र लाभार्थियों की जांच कर पात्र गरीबों को उनका हक दिलाया जाएगा? इन सवालों के जवाब कार्रवाई के बाद ही सामने आएंगे।