Tuesday, 28-04-2026
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निजी नर्सिंग होम की बर्बरता से नवजात की मौत, अस्पताल सील; सीएचसी प्रभारी हटाए गए

रिपोर्ट सैयद तुफैल अहमद

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बदायूं(जे०आई०न्यूज़) बताते चलें जिले के कादरचौक थाना क्षेत्र में एक बेहद दर्दनाक और चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां एक निजी नर्सिंग होम की कथित लापरवाही और अमानवीय व्यवहार के चलते एक नवजात की मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों में भारी आक्रोश फैल गया और अस्पताल में जमकर हंगामा हुआ। प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित नर्सिंग होम को सील कर दिया है, जबकि सीएचसी प्रभारी को पद से हटा दिया गया है।


क्या है पूरा मामला?


आपको बता दें गांव ललसी नगला निवासी छोटेलाल अपनी पत्नी कृष्णवती को प्रसव पीड़ा होने पर रविवार को कादरचौक स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) लेकर पहुंचे थे। परिजनों का आरोप है कि वहां मौजूद स्टाफ ने स्थिति को गंभीर बताते हुए उन्हें पास के निजी अस्पताल राधिका नर्सिंग होम भेज दिया।

आरोप है कि नर्सिंग होम में डिलीवरी के नाम पर 15 हजार रुपये लिए गए और लेबर रूम में एक महिला कर्मचारी ने प्रसूता के पेट और सीने पर बैठकर जबरन दबाव बनाया, जिससे नवजात की मौके पर ही मौत हो गई। इस अमानवीय कृत्य ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया।


हंगामा और प्रशासनिक कार्रवाई


घटना की जानकारी मिलते ही परिजन भड़क उठे और अस्पताल परिसर में जोरदार हंगामा किया। सूचना पर पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी की प्रारंभिक जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं,


 जिसके बाद:

अस्पताल सील: 


बिना योग्य डॉक्टर और मानकों के विपरीत संचालन पाए जाने पर राधिका नर्सिंग होम को तत्काल सीज कर दिया गया।

सीएचसी प्रभारी हटाए गए: कादरचौक सीएचसी के प्रभारी डॉ. अवधेश राठौर को उनके पद से हटा दिया गया।


मुकदमा दर्ज: पुलिस ने डॉक्टर सहित पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

बताया जा रहा है कि संबंधित नर्सिंग होम डॉ. राठौर के परिवार से जुड़ा हुआ है, जिससे मामले ने और तूल पकड़ लिया है।

स्वास्थ्य विभाग सख्त

सीएमओ डॉ. श्री मोहन झा ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए स्त्री रोग विशेषज्ञ समेत तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की गई है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

यह घटना न केवल स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और निगरानी तंत्र की भी पोल खोलती है। स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश व्याप्त है और सभी दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की जा रही है।

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