Saturday, 13-06-2026
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मशहूर शायर, वरिष्ठ पत्रकार व अधिवक्ता सिब्तेन अख़गर साहब हुए सुपुर्द-ए-खाक

रिपोर्ट सैयद तुफैल अहमद

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बदायूं (जे०आई०न्यूज़) सहसवान बताते चलें उर्दू अदब, पत्रकारिता और वकालत की दुनिया का एक रोशन सितारा हमेशा के लिए बुझ गया। सहसवान के मशहूर शायर, वरिष्ठ पत्रकार एवं वरिष्ठ अधिवक्ता सैय्यद एस.एन.आर. नक़वी उर्फ़ सिब्तेन अख़गर का लंबी बीमारी के बाद दिल्ली में इंतिक़ाल हो गया। उनके निधन की खबर से पूरे क्षेत्र में गहरा शोक फैल गया।

उनका पार्थिव शरीर सहसवान लाया गया, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने नम आंखों से आखिरी दीदार किया। बाद नमाज़-ए-जनाज़ा उन्हें कोट स्थित कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया गया। जनाज़े में अदबी, सामाजिक, पत्रकारिता और वकालत जगत से जुड़े तमाम लोगों की मौजूदगी ने यह साबित कर दिया कि सिब्तेन अख़गर साहब केवल एक शख्सियत नहीं, बल्कि एक संस्था थे।

सिब्तेन अख़गर साहब ने अपनी जिंदगी इल्म, अदब और इंसानियत के नाम कर दी थी। उनकी शायरी में समाज का दर्द, मोहब्बत की खुशबू और इंसानी एहसासात की गहराई साफ दिखाई देती थी। उनके अशआर लोगों के दिलों में उतर जाते थे और देर तक असर छोड़ते थे।

उनकी चर्चित किताब लमयाजिल ने उन्हें मुल्क ही नहीं बल्कि विदेशों तक पहचान दिलाई। उर्दू अदब से जुड़े लोगों ने उनकी शायरी को बेहद पसंद किया और उन्हें एक संवेदनशील शायर के रूप में सम्मान दिया।

पत्रकारिता के क्षेत्र में भी उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। क़ौमी आवाज़ से जुड़े रहते हुए उन्होंने हमेशा समाज के कमजोर और दबे-कुचले तबकों की आवाज़ उठाई। उनकी बेबाक और जिम्मेदार पत्रकारिता लोगों के लिए मिसाल मानी जाती थी।

वकालत के पेशे में भी सिब्तेन अख़गर साहब ने ईमानदारी और इंसाफ़ को हमेशा प्राथमिकता दी। उनके इंतिक़ाल पर अधिवक्ताओं ने शोक व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

अदबी संगठनों, पत्रकारों, समाजसेवियों और उनके चाहने वालों ने कहा कि सिब्तेन अख़गर साहब का जाना उर्दू अदब, पत्रकारिता और समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनकी शायरी, उनका अंदाज़-ए-बयां और उनकी यादें हमेशा लोगों के दिलों में ज़िंदा रहेंगी।

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